एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में
आयनीकरण विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो।
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स्‍वयं-पूर्ण शुष्‍क स्रोत भंडारण गामा किरणकों के व्‍यापारिक नाम हैं – गामा किरणन कक्ष, गामा कक्ष, रक्‍त किरणक या गामा सेल। ऐसे किरणक कई विश्‍वविद्यालयों, शैक्षणिक व अनुसंधान संस्‍थानों में अनुसंधान व विकास कार्यों में प्रयुक्‍त हो रहे हैं। इन्‍हें चिकित्‍सा व अनुसंधान कार्य के लिये अस्‍पतालों व रक्‍त बैंकों में रक्‍त व रक्‍त उत्‍पादों/घटकों के किरणन के लिये भी प्रयोग किया जाता है। इन किरणकों में दस से कई सौ TBq सक्रियता के Co-60 या Cs-137 स्रोत होते हैं। इन उच्‍चसक्रियता स्रोतों को दो उपकरणों में बंद तथा सीसे द्वारा परिरक्षित करके स्‍टेनलेस इस्‍पात की स्रोत के असेंबली में रखा जाता है। कई सौ Kev रेटिंग के एक्‍स-रे आधारित किरणन कक्ष भी अनुसंधान संस्‍थानों, अस्‍पतालों व रक्‍त बैंकों के रक्‍त तथा रक्‍त उत्‍पादों/घटकों के किरणन के लिये प्रयोग किये जाते हैं। रक्‍त किरणक एक प्रकार का गामा किरणन कक्ष है। रक्‍त व रक्‍त उत्‍पादों का गामा किरणों द्वारा किरणन रक्‍त-आधान के बाद अस्‍वीकारता के खतरे से बचने की स्‍थापित विधि है। गामा कक्षों का शैक्षणिक संस्‍थानों में भी अनुंसधान व विश्‍लेषण के लिये भी विस्‍तृत उपयोग होता है।

गामा किरणक कक्ष/रक्‍त किरणक का पात्र टाईप ‘B’ परिवहन पैकेज की आवश्‍यकताओं की पूर्ति के अनुरूप डिज़ाइन किया जाता है। किरणक का कुल भार 3 टन से 10 टन के बीच होता है अत: इसे ऐसे कमरे में स्‍थापित किया जाना चाहिये जिसका फर्श इस भार को सहन करने में सक्षम हो।

कम संख्‍या में कुछ किरणक कक्ष रेडियोनाभिक के बजाय एक्‍स-रे आधारित भी हो सकते हैं।


किरणन कक्ष के प्रयोग का एक उदाहरण :
आरोपण के लिये ऊतकों का किरणन किया जाता है तथा
किरणित उल्‍ब (omnion) को जलने के घाव पर आरोपित किया जाता है।

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संरक्षा पहलू :

अंतर्निहित डिज़ाइन संरक्षा तथा परिरक्षण (टाईप B - पैकेजिंग) स्रोत की संरक्षा सुनिश्चित करते हैं। संरक्षा के बारे में प्रमुख मुद्दा स्रोत के समुचित निपटान को सुनिश्चित करना है।

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Last Updated: 29-12-2025 02:48:17 PM