एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में
आयनीकरण विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो।
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भारत में आयनीकरण विकिरण और परमाणु ऊर्जा के उपयोग से श्रमिकों, आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर अस्वीकार्य प्रभाव न पड़े, यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15 नवंबर 1983 को एईआरबी की स्थापना की गई थी। एईआरबी ने नवंबर 2007 से नवंबर 2008 तक अपनी रजत जयंती मनाई। रजत जयंती वर्ष के शुभारंभ के उपलक्ष्य में 23 नवंबर 2007 को एक समारोह आयोजित किया गया। एईसी के अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर मुख्य अतिथि थे। गणमान्य व्यक्तियों के संबोधनों के अलावा, इस अवसर पर एईआरबी के कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई "एईआरबी आचार संहिता" और "संभाव्यता सुरक्षा मूल्यांकन पर एक मोनोग्राफ" का विमोचन किया गया। रजत जयंती वर्ष समारोह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों की योजना बनाई गई थी। रजत जयंती समारोह का समापन 17-21 नवंबर, 2008 के दौरान परमाणु प्रतिष्ठान सुरक्षा के सामयिक मुद्दों पर आईएईए के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के साथ हुआ। रजत जयंती दिवस पर एईआरबी के ऐतिहासिक पहलुओं पर एक पुस्तक का विमोचन किया गया। रजत जयंती पुस्तक के अध्यायों के लिंक नीचे दिए गए हैं।

एईआरबी रजत जयंती पुस्तक का पूर्ण संस्करण [4.59 एमबी] देखने के लिए यहां क्लिक करें (4 एमबी) पीडीएफ

 

 

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Last Updated: 29-12-2025 02:48:17 PM