एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में
आयनीकरण विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो।
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परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) परमाणु एवं विकिरण सुविधाओं और गतिविधियों को विनियमित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत में आयनीकरण विकिरण और परमाणु ऊर्जा का उपयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अनुचित जोखिम पैदा न करे।

एईआरबी, डीएई की इकाइयों में औद्योगिक सुरक्षा का भी प्रबंधन करता है।

एईआरबी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, परमाणु ईंधन चक्र, कण त्वरक आदि से लेकर मेडिकल एक्स-रे, न्यूक्लियोनिक गेज आदि तक की सुविधाओं और गतिविधियों के एक व्यापक स्पेक्ट्रम को विनियमित करता है। ये सुविधाएं और गतिविधियां संख्या के साथ-साथ देश भर में उनके फैलाव में भी भिन्न होती हैं।

एईआरबी अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए विभिन्न नियामक प्रक्रियाओं का उपयोग करता है। ये प्रक्रियाएं कुशल विनियमन के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण सुनिश्चित करती हैं। प्रमुख प्रक्रियाएं इस प्रकार हैं:

  • उपयोगिताओं और उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा आवश्यकताओं और दिशानिर्देशों का विकास
  • सुरक्षा आवश्यकताओं और दिशा-निर्देशों के आधार पर विभिन्न सुविधाओं और गतिविधियों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया
  • लाइसेंस की शर्तों और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुपालन की जांच के लिए नियामक निरीक्षण।

एईआरबी अपनी प्रक्रियाओं का आकलन करने और उन्हें और विकसित करने के लिए संगठनात्मक अनुभव और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संसाधनों से प्राप्त अन्य संबंधित प्रतिक्रियाओं/इनपुट को ध्यान में रखता है।

जहां एईआरबी के अध्यक्ष को सक्षम प्राधिकारी के रूप में नामित किया जाता है, वहां एईआरबी के पास नियमों की आवश्यकताओं और प्रावधानों को लागू करने की शक्तियां हैं।

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Last Updated: 29-12-2025 02:48:17 PM