एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में
आयनीकरण विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो।
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एईआरबी के संविधान के आधार तथा विनियामक प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले अधिनियम, नियम और विनियम जो संदर्भ हेतु यहाँ सूचीबद्ध किए गए हैं।

भारत में परमाणु सुविधाओं की संस्थापना तथा उपयोग तथा रेडियोधर्मी स्रोतों के प्रयोग से संबंधित गतिविधियों को परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के प्रावधानों के तहत संचालित किया जाता है। यह अधिनियम ......, और 2015 में संशोधित किया गया था ।

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पहलुओं को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लागू किया जाता है ।विकिरण सुरक्षा से संबंधित पहलुओं को विकिरण संरक्षा नियमावली, 1962 के तहत लागू किया गया है । विहित पदार्थों के खनन और मिलिंग में सुरक्षा पहलुओं को खान एवं निर्धारित खनिज तत्व नियमावली, 1984 के तहत लागू किया गया है। अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण को परमाणु ऊर्जा (परमाणु ऊर्जा (रेडियोएक्टिव अपशिष्टों का निरापद निस्तारण) नियमावली, 1987) के तहत सुनिश्चित किया जाता है ।

एईआरबी के संविधान के आधार तथा विनियामक प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले अधिनियम, नियम और विनियम जो संदर्भ हेतु यहाँ सूचीबद्ध किए गए हैं।

भारत में परमाणु सुविधाओं की संस्थापना तथा उपयोग तथा रेडियोधर्मी स्रोतों के प्रयोग से संबंधित गतिविधियों को परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के प्रावधानों के तहत संचालित किया जाता है। यह अधिनियम ......, और 2015 में संशोधित किया गया था ।

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पहलुओं को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लागू किया जाता है ।विकिरण सुरक्षा से संबंधित पहलुओं को विकिरण संरक्षा नियमावली, 1962 के तहत लागू किया गया है । विहित पदार्थों के खनन और मिलिंग में सुरक्षा पहलुओं को खान एवं निर्धारित खनिज तत्व नियमावली, 1984 के तहत लागू किया गया है। अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण को परमाणु ऊर्जा (परमाणु ऊर्जा (रेडियोएक्टिव अपशिष्टों का निरापद निस्तारण) नियमावली, 1987) के तहत सुनिश्चित किया जाता है ।

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Last Updated: 29-12-2025 02:48:17 PM