एईआरबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में
आयनीकरण विकिरण तथा नाभिकीय ऊर्जा के कारण लोगों के
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किसी भी प्रकार का अवांछित जोखिम न हो।
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भारत के नागरिकों के कल्याण एवं अन्य संबंधित शांतिपूर्ण उद्देश्यों हेतु परमाणु ऊर्जा के विकास, नियंत्रण एवं प्रयोग के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम लागू किया गया है। इस अधिनियम के तहत भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से संबंधित सभी गतिविधियों तथा आयनीकारक विकिरण के प्रयोग के लिए एक बुनियादी नियामक रूपरेखा प्रदान की गई है। परमाणु ऊर्जा अधिनियम में दिए गए 32  अनुच्छेदों में से संरक्षा से संबंधित अनुच्छेद हैं अनुच्छेद 3 (e) (i), (ii) व (iii), 16, 17 व 23|

परमाणु ऊर्जा अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा नामित परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी), परमाणु और विकिरण सुविधाओं के लिए सहमति, नवीकरण, निकासी और सहमति के लिए नियामक निकाय के रूप में सक्षम प्राधिकरण है। नियामक निकाय परमाणु प्रतिष्ठानों तथा विकिरण पदार्थों के प्रयोग एवं इस प्रकार के संस्थापनाओं के बाहर विकिरण उत्पन्न करने वाले संयंत्रों पर नियंत्रण रखने का कार्य भी करता है।

परमाणु ऊर्जा अधिनियम के अनुच्छेद 16 और 17 में रेडियोधर्मी पदार्थों पर नियंत्रण तथा सुरक्षा के लिए और विशेष प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 23 कारखाना अधिनियम 1948 लागू करने के साथ नियामक निकायों को सशक्त करता है इसके तहत दी गई शक्तियों में शामिल है, इसके प्रावधानों को लागू करना, निरीक्षक स्टाफ की नियुक्ति करना तथा परमाणु ऊर्जा विभाग (पऊवि) की संस्थापनाओं के लिए नियम बनाना|

ध्यान दें

  • एईआरबी को भी रेडियोधर्मी पदार्थों के संबंध में पर्यावरण संरक्षा अधिनियम 1986 के अनुच्छेद 10 (1) (प्रविशिष्टि की शक्तियाँ) तथा 11(1) (नमूने लेने की शक्तियाँ) तथा पर्यावरण संरक्षा (संशोधित) नियमावली 1987 के नियम 12 के तहत कार्य करने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं (वह एजेंसी जिसे प्रदूषक तत्वों के अधिक निस्स्सरण की सूचना दी जा सकती है) ।
  • वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 52 के अनुसार रेडियोधर्मी वायु प्रदूषण के संबंध में परमाणु ऊर्जा अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे ।

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Last Updated: 09-02-2026 01:10:18 PM